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''TOOLSIDAS JUNIOR''-Movie Review ''तुलसीदास जूनियर''-फिल्म समीक्षा

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  “ सुरतिय , नरतिय , नागतिय अस चाहत सब कोय। ’’ “ गोद लिए हुलसी फिरे , तुलसी सो सुत होय। ’’ फिल्म तुलसीदास जूनियर देखकर ये दोहा बरबस ही याद आ गया। फिल्म का किरदार तुलसीदास जूनियर/मिडि व उसको निभाने वाला बालक वरुण बुद्धदेव मोह लेता है। मिडि से अंत तक सबको(सड़क के अर्धविक्षिप्त भिखारी को भी) अथाह प्रेम हो जाता है। उपरोक्त दोहा और फिल्म वर्तमान मे कई मायनों मे मिडि व उसके कोच/प्रशिक्षक मोहम्मद सलाम को महाकवि/जनकवि/मानस के हंस ‘ तुलसीदास ’ तथा रहमदिल सनातनी कवि , अकबर के दरबारी ‘ रहीम ’( अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना) से जोड़ते हैं। कई दृश्य तुलसी-रहीम के एक-एक दोहे की तरह खूबसूरती से गढ़े गए हैं। मिडि कोई अभाव मे जी रहा बच्चा नहीं जो सफलता का प्रयास करता है जैसा कि आम तौर पर इस तरह की पटकथाओं मे दिखाया जाता है। ये फिल्म सुविधाओं में रहते हुए भी भाव/ जुनून/लगन/ एक निष्ठता बनाए रखने वाले एक बच्चे की कहानी है जो अपने परिवार में समन्वय व मंगल स्थापन करना चाहता है। ऐसी संतान कौन दंपत्ति नहीं चाहेगा ? ऊपर के दोहे की पंक्तियाँ श्लेष अलंकार(एक शब्द के दो या अधिक अर्थ)लिए हुए है। पहली पंक्ति { सु...