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''भाव''-लघु कथा ''Bhaw''- short story

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 बेहद गरीब से दिखने वाले  बुजुर्ग के पास सब्जी लेने एक जोड़ा पहुंचा। बुजुर्ग सब्जी वाले ने जो भाव बताया वह उस जोड़े में से पहले को ज्यादा लगा उसने सब्जी लेने मना किया।  फिर भी दूसरे ने कहा कोई बात नहीं ले लेते हैं। पहले ने दूसरे से पूछा –ऐसा क्यों किया? ज्यादा भाव में क्यों ले लिया? दूसरे ने कहा अगर वह 2 –4 रुपए अधिक ले भी ले, तो क्या! गरीब है बेचारा,हम दान देते हैं ना। तब पहले ने कहा अच्छा अगर वह इसी तरह अभिनय करके आपसे ज्यादा कमा रहें हों तो?तो क्या? तब दूसरे ने कहा- तो भी क्या,मुझमें उन्हे देखकर जो मदद करने का भाव आया, उस भाव के लिए मैं उनका कृतज्ञ रहूंगा। यह ''भाव'' मनुष्यता के लिए जरूरी है। मोल–भाव तो जीवन में चलता ही रहेगा। इस ब्लॉग पर उपलब्ध अन्य लेखों (Articles) को पढ़ने के लिए कृपया नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।     https://darshakop.blogspot.com/?m=1