Posts

Showing posts from September, 2024

आभासी कदाचार (Virtual Malpractice)

Image
  आभासी कदाचार/कुप्रथा (Virtual Malpractice/Evil Practice)  एक नई सामाजिक कुरीति पनप रही है। इतिहास से लेकर अब तक हम कई सामाजिक कुरीतियों जाति प्रथा, रंग भेद, लिंग भेद,  सती प्रथा, बाल विवाह आदि आदि के बारे में जानते हैं। यह समझ आ रहा है कि अभी एक और सामाजिक कुरीति पनप रही है जिसे हम सोशल मीडिया में फेक, अवैध, अफवाह, झूठ के प्रसार  के रूप में देखते हैं। कोई एक दो शब्दों में इसे–आभासी पागलपन/ आभासी लापरवाही/ आभासी बदहवासी/ आभासी भूख/आभासी दुर्बलता/ आभासी कुप्रथा/कदाचार  भी कह सकते हैं। कोई भी व्यवस्था या खोज अच्छे उद्देश्य से अथवा अच्छी आशा अथवा अच्छी नीयत से समाज के सामने लाई जाती है या यूं कहे समाज को सुगम रूप से सरल रूप से  सुचारू रूप से चलाने के लिए लाई जाती है परंतु वही व्यवस्था धीरे-धीरे विकृत होने लगती है।आज इस इंटरनेट सोशल मीडिया के दौर में कोई भी मोबाइल चलाने वाला या सामान्य जानकारी रखने वाला इंसान सोशल मीडिया प्लेटफार्म में अथवा अपना चैनल  आदि बनाकर कुछ भी दावे करता है और उसको मानने वाले लोग भी मिल जाते हैं। दावा करने वाला हर इंसान झूठा नहीं ह...

विभाजनकारी Vs समन्वयवादी पार्ट- 2

Image
*वर्तमान में जो भी पढ़ा लिखा या अनपढ़ जीव अथवा जीव समूह भारत भूमि में प्राचीन काल या बाद में जन्में फले फूले धर्म, पंथ, समुदाय को आपस में विरोधी बता कर मैं श्रेष्ठ मैं श्रेष्ठ का प्रलाप करेगा उसे विभाजनकारी ही मानना चाहिए।* क्योंकि विविधतापूर्ण भारतीय सनातनी परंपरा में प्रारंभ से ही प्रकृति पूजा, देव पूजा, गुरु पूजा, पूर्वज पूजा, निराकार ब्रह्म उपासना, ईश्वर को नहीं मानने वाली धारा समानांतर रूप से चलते आ रहे हैं। भारत के ऐसे कई पुरातात्विक मंदिर/ स्थल हैं जहां सनातनी, जैन, बौद्ध  तीनों की मूर्तियां एक साथ मिलती है, जहां प्रकृति की भी पूजा हो रही  है ये है समन्वय। दशावतारों में मत्स्य से लेकर राम कृष्ण बुद्ध कल्कि शामिल हैं ये है समन्वय। मानस में शैव, वैष्णव, साक्त के देवी देवताओं को एक दूसरे की पूजा करते दिखाया गया है ये है समन्वय। गुरुग्रंथ साहब में सभी पंथ के निर्गुण संतों की वाणी का संग्रहण किया गया ये है समन्वय। सिक्ख गुरुओं का सनातन की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान सर्वोच्च समन्वय का उदाहरण है। सभी मार्ग, पंथ का उच्चतर उद्देश्य मुक्ति है विभाजनकारियों को इससे कोई मतलब नहीं...

विभाजनकारी Vs समन्वयवादी पार्ट 1

Image
  आज देश में विभाजनकारी नहीं समन्वयात्मक विचारधारा की आवश्यकता है।वरना गृह युद्ध नजदीक है। अगर हम दशावतारों के बारे में  पढ़ें तो पता चलता है उसमें मत्स्य से प्रारंभ होकर राम,कृष्ण, बुद्ध, कल्कि भी शामिल है। ये समन्वय का उच्चतम प्रयास है। मानस में शैव,वैष्णव और शाक्त का सुंदर समन्वय किया गया है। टकराव नहीं है। मेरा, आपका  गांव, शहर, जिला, राज्य, देश,विश्व विविधताओं से भरा हुआ है कौन किसे पूजेगा मानेगा क्या करेगा यह उसकी व्यक्तिगत इच्छा है। एक ही जयंती या त्योहार को भारत के अलग अलग राज्यों में अलग अलग नाम से अलग समयों पर मनाया जाता है।ये विविध खूबसूरती सिर्फ भारत में दिखती है। हम आप इतिहास को ठीक से पढ़ें तो यही पता चलता है कि भारत में विविध पंथ,दर्शन  एक साथ फले-फूले   भारत समन्वय का देश रहा है इसलिए इतने सारे पंथ, संप्रदाय विकसित हुए। यहां भारत में जिन्होंने यह कहा कि भगवान नहीं है या मैं नास्तिक हूं जैसे सबसे बड़े उदाहरण है चार्वाक उसको भी ऋषि या महर्षि चार्वाक कहा गया किसी ने उसका सर नहीं काटा, न ज़हर दिया।  यह उदात्त भारतीय संस्कृति है। हम आप जैसे ...