आभासी कदाचार (Virtual Malpractice)
आभासी कदाचार/कुप्रथा (Virtual Malpractice/Evil Practice)
एक नई सामाजिक कुरीति पनप रही है। इतिहास से लेकर अब तक हम कई सामाजिक कुरीतियों जाति प्रथा, रंग भेद, लिंग भेद, सती प्रथा, बाल विवाह आदि आदि के बारे में जानते हैं। यह समझ आ रहा है कि अभी एक और सामाजिक कुरीति पनप रही है जिसे हम सोशल मीडिया में फेक, अवैध, अफवाह, झूठ के प्रसार के रूप में देखते हैं। कोई एक दो शब्दों में इसे–आभासी पागलपन/ आभासी लापरवाही/ आभासी बदहवासी/ आभासी भूख/आभासी दुर्बलता/ आभासी कुप्रथा/कदाचार भी कह सकते हैं।कोई भी व्यवस्था या खोज अच्छे उद्देश्य से अथवा अच्छी आशा अथवा अच्छी नीयत से समाज के सामने लाई जाती है या यूं कहे समाज को सुगम रूप से सरल रूप से सुचारू रूप से चलाने के लिए लाई जाती है परंतु वही व्यवस्था धीरे-धीरे विकृत होने लगती है।आज इस इंटरनेट सोशल मीडिया के दौर में कोई भी मोबाइल चलाने वाला या सामान्य जानकारी रखने वाला इंसान सोशल मीडिया प्लेटफार्म में अथवा अपना चैनल आदि बनाकर कुछ भी दावे करता है और उसको मानने वाले लोग भी मिल जाते हैं। दावा करने वाला हर इंसान झूठा नहीं होता। सोशल मीडिया केअधिकांश दावे 1% सच्चाई में 99% झूठ मनगढ़ंत कहानी बनाकर पेश किए जा रहे है। इन दावों को मानने वाला आंख मूंदकर स्वीकार कर लेता है, पड़ताल नहीं करता, किसी वैध स्रोत के पास नहीं जाता। ये संदेश,चैट, लिंक, वीडियो आदि एक दूसरे से होते हुए कई ग्रुप आदि में प्रसारित होते रहते हैं।आलम यह है कि हर एक झूठ के समर्थन में हजारों लाखों कंटेंट उपलब्ध है,हर एक सच के विरोध में भी हजारों लाखों कंटेंट उपलब्ध है और हर भाषा में उपलब्ध है। अब क्या किया जाए आदमी कैसे पता करें कि सच क्या है तो इसका तरीका हो सकता है कि वर्तमान में विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जो संदर्भ पुस्तक शामिल की गई है उनका अध्ययन करें अथवा यूजीसी केयर लिस्ट में शामिल पत्र पत्रिकाओं का अध्ययन करें ये ऑनलाइन उपलब्ध हैं। यदि इतना समय किसी के पास नहीं है तो कम से कम फॉरवर्ड न करे।अपनी सामान्य बुद्धि और तर्क लगाकर भी कई चीजों को समझा जा सकता है।आगे आभासी कुप्रथाओं के कुछ उपवर्गों को बताया गया है।
**सोशल मीडिया : कुओं में टर्राते मेंढक
जाका गुरु आंधला, चेला खरा निरंध
अंधा, अंधेही ठेलिया, दोनों कूप पड़त
डेटा क्रांति से कुओं में क्रांति आ गई है। फोटो,वीडियो, टेक्स्ट आदि साझा करने वाले सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अलग अलग ग्रुप या चैनल बन गए हैं। जाति,वर्ग, धर्म,संप्रदाय,भाषा,क्षेत्र,राजनैतिक झुकाव आदि एक ही मत या विचारधारा का अंध समर्थन करने वाले ग्रुप या चैनल कुओं की तरह है। इन कुओं में सिर्फ अपने जाति,वर्ग, धर्म,संप्रदाय,भाषा,क्षेत्र,राजनैतिक झुकाव आदि के समर्थन में और अन्य के विरोध में हर मेंढक उसी कुएं में टर्रा रहा है, अफवाह,झूठ,कुतर्क, दुष्तर्क, टेम्पर्ड सूचना का मल मूत्र, समस्त अपशिष्ट प्रत्येक मेढक त्याग रहा है और सभी मेंढक एक दूसरे के अपशिष्ट को स्वादिष्ट बता कर ग्रहण कर रहे हैं। मजे की बात ये है कि सभी कुएं एकदम सटे हुए हैं। सभी कुओं के टर्राने की आवाज सभी कुओं तक पहुंच रही है।सभी के अपने मन/मत/मल के समर्थन वाले सैकड़ों हजारों चैनल या ग्रुप या कुएं सोशल मीडिया में उपलब्ध है। अगर कोई आकर इन्हें बताए समझाए कि ये देश और दुनिया विविधता से भरा है कुएं से निकलो तो कूपमण्डूक कहता है तुम कौन? तुम्हे कुछ नहीं पता, सब बदल जाएगा अंततः सभी मेंढक हमारे कुएं को ही श्रेष्ठ मानेंगे और सभी कुएं हमारे होंगे।
केस स्टडी
एक धूर्त लोमड़ नाम का मेंढक है वह अपने संप्रदाय/मत के कुछ या सभी चैनल/ग्रुप/कुएं में कूदा/जुड़ा या जोड़ा/कुदाया गया। 24 घंटे उस ग्रुप में सिर्फ उसी संप्रदाय/समूह की महानता, समर्थन, और अन्य (विशेषकर जिस संप्रदाय/मत से लोगों को अपने मत/संप्रदाय में मिलाना है) के विरोध, विनाश की बातें, वीडियो,फोटो, टेंपर्ड सूचना आदि साझा किए जा रहे हैं। अच्छा उस मेंढक का नाम धूर्त लोमड़ इसलिए पड़ा क्योंकि वो इतिहास, भूगोल, विज्ञान,भाषा पढ़ने के बाद उच्च पद पाने के बाद भी सिर्फ उस कुएं को स्वर्ग मानता है। पहले उसका नाम विद्यार्थी था। इन कुओं में जैसा माहौल मिलता है वैसा संस्कार वैसी सोच विकसित हो जाती है। संकीर्ण सोच के कारण उदारवादी, समन्वयात्मक दृष्टिकोण खत्म हो जाता है अंततः मेंढक विभाजनकारी बातें करने लगता है(विभाजनकारी ध्वनि में टर्राता है)
**सोशल मीडिया के ठेकेदार उर्फ स्वयंभू उर्फ हिटलर उर्फ बाबा धूर्तानंद उर्फ बाबा लंपट लोमड़ानंद उर्फ बाबा पढ़े लिखे अनपढ़ानंद उर्फ बाबा आत्ममुग्धानंद उर्फ कूप मंडूकानंद उर्फ पोंगेश्वर बाबा उर्फ बाबा मारीचानंद उर्फ गुरु घंटाल उर्फ........* के बोल बच्चन
1) सिर्फ मैं ही सही हूं
2)सिर्फ मैं ही समझदार हूं
3) सिर्फ मैं ही बदतमीजी कर सकता हूं
4)सिर्फ मैं ही ज्ञानी हूं
5)जो मुझसे सहमत नहीं वो मूर्ख है
6) मेरे मत के समर्थन में हर अफवाह सत्य है।
7) मेरे मत के विपरित हर बात अफवाह है सबूत दोगे तब भी नहीं मानूंगा।
8) मेरे कुएं में कोई और नहीं टर्रा सकता
9) कई बार गलत सिद्ध होने पर भी मुझे फर्क नहीं पड़ता फिर भी कोई मुझे गलत या बेशर्म न कहे
10) सिर्फ मेरे पास शब्द भंडार है
11)मेरा बकवास सुनने, देखने, पढ़ने तारीफ के लिए समय दो
12) तुम्हारे पास मेरे मत के विपरित रिप्लाई करने के लिए फालतू समय आता कहां से है?
14)सिर्फ मैं ही अपने बातों को काट सकता हूं।
15) मेरे मुंह से निकला बदतमीजी पूर्ण बात दिव्य है संस्कारित है
16) मेरी हर बे सिर पैर की व्याख्या सही है।
17) चुपचाप मेरे बोल बच्चन (अहंकार) का पोषण करो वरना मैं तुम्हे अपने कुतर्कों के ब्रह्माण्ड में खींचकर सजा दूंगा और पर्सनल चैट में बदतमीजी पूर्ण बातें लिखकर प्रताड़ित करूंगा क्योंकि मैं और सिर्फ मैं इस ब्रह्माण्ड का रचयिता हूं हा... हा....हा.....
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