हिंदी के प्रति-लघु कथा
चालीस पार प्रातः भ्रमणकारी समूह में सभी के पास मजबूत आर्थिक आधार है। हम तमाम बातें सुबह-सुबह ही कर लेते हैं। इसी समूह में हिंदी के एक शिक्षक भी हैं। हम में से अधिकांश लोग हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के विस्तार को लेकर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि- हिंदी शिक्षक महोदय जिस संस्था में पढ़ाते हैं वहां हमारी ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक हिंदी मासिक पत्रिका प्रारंभ किया जाए। हम चर्चिया (बहस मिश्रित चर्चा) ही रहे थे कि, हिंदी शिक्षक महोदय बहुत प्रसन्नता से बोले मेरा बेटा गणित, अंग्रेजी, विज्ञान में बहुत अच्छे नंबर लाता है, सिर्फ.. हिंदी में कमजोर हैss हेss हेss हे sss ...हिंदी उसके पल्ले ही नहीं पड़ती। और. और..हेss हेss हेsss..पता मेरी बड़ी बिटिया तो परीक्षाओं की तैयारी के लिए सिर्फ अंग्रेजी पत्रिका ही पढ़ती है। हिंदी पत्रिका को तो वह पढ़ ही नहीं पाती हेss हेss हेsss.. यह बताते हुए उन हिंदी शिक्षक महोदय के चेहरे पर जो गर्व और खुशी का भाव उभरा वह हम में से कइयों को चाहिए था। तो, उन सभी ने कहा हेss हेss हेsss.. सेम हियर (same here/ हमारे यहां के बच्चों का भी यही हाल है) हेss हेss हेsss.. । रोज़गार या अन्य कारणों से किसी भी भाषा को जरूर सीखना चाहिए। जितना ज्यादा भाषा सीख सके उतना अच्छा। सभी भाषाओं का सामान आदर करना चाहिए। अंत में सभी भाषाओं को एक दूसरे से मिलकर एक ही दिशा में जाना है। पर अपनी मातृ भाषा के प्रति हीन भावना?? ये क्या निष्कर्ष निकल गया इस समूह में हिन्दी के प्रति! हिंदी दिवस के दिन।
पुरोनी(छत्तीसगढ़ी शब्द) /Extra Notes- विश्व हिन्दी दिवस या सम्मेलन प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। हिन्दी दिवस या राष्ट्रीय हिन्दी दिवस प्रतिवर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिया था।
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